अब डिग्री नहीं, स्किल बनेगी पहचान: क्या है Digital Skills Passport और कैसे बदलेगा नौकरी का तरीका?

नई दिल्ली। बदलते रोजगार बाजार में सिर्फ डिग्री होना पर्याप्त नहीं रह गया है। कंपनियां अब उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता, तकनीकी दक्षता और काम के अनुभव को भी महत्व दे रही हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए नीति आयोग ने भारत के स्किलिंग सिस्टम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इनमें सबसे चर्चित प्रस्तावों में से एक है Digital Skills Passport

नीति आयोग की रिपोर्ट ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ में Digital Skills Passport को शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल बनाने वाले महत्वपूर्ण सिस्टम एनेबलर के रूप में प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य एक ऐसा डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना है, जिसमें किसी व्यक्ति की शिक्षा, प्रमाणपत्र, कौशल और कार्य अनुभव को एक जगह सुरक्षित और सत्यापित तरीके से दर्ज किया जा सके।

क्या है Digital Skills Passport?

आसान भाषा में समझें तो Digital Skills Passport एक तरह का डिजिटल करियर रिकॉर्ड होगा। इसमें किसी व्यक्ति ने कहां से पढ़ाई की, कौन-से कोर्स किए, कौन-सी स्किल सीखी, कौन-सा सर्टिफिकेट हासिल किया और कहां काम किया—इन जानकारियों को एक डिजिटल प्रोफाइल से जोड़ा जा सकेगा।

अभी नौकरी के लिए उम्मीदवारों को अलग-अलग मार्कशीट, डिग्री, सर्टिफिकेट, ट्रेनिंग प्रमाणपत्र और अनुभव से जुड़े दस्तावेज दिखाने पड़ते हैं। Digital Skills Passport का विचार इस प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और डिजिटल बनाने का है।

नीति आयोग के प्रस्ताव के अनुसार, प्रत्येक learner और worker के लिए एक ऐसा डिजिटल अकाउंट बनाया जा सकता है, जिसमें verified credentials, skills और work experience का रिकॉर्ड उपलब्ध हो।

क्यों पड़ी Digital Skills Passport की जरूरत?

भारत में हर साल बड़ी संख्या में युवा स्कूल और कॉलेज से निकलकर रोजगार बाजार में प्रवेश करते हैं। लेकिन शिक्षा और नौकरी के बीच कौशल का अंतर अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

कई युवाओं के पास डिग्री होती है, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी practical skills, communication skills, digital knowledge या industry experience पर्याप्त नहीं होता। दूसरी तरफ कंपनियों के लिए भी उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता का आकलन करना हमेशा आसान नहीं होता।

ऐसे में Digital Skills Passport का उद्देश्य डिग्री-केंद्रित सिस्टम से skills-focused सिस्टम की ओर बदलाव को बढ़ावा देना है। नीति आयोग ने अपनी हालिया स्किलिंग रिपोर्ट में भी शिक्षा और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल तथा outcome-based skilling पर जोर दिया है।

इसमें कौन-कौन सी जानकारी हो सकती है?

Digital Skills Passport की अवधारणा को एक डिजिटल प्रोफाइल के रूप में समझा जा सकता है। इसमें व्यक्ति की अलग-अलग उपलब्धियों को जोड़ा जा सकता है, जैसे—

  • शैक्षणिक योग्यता और डिग्री
  • व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण
  • Skill certificates
  • Apprenticeship और internship का अनुभव
  • नौकरी का अनुभव
  • हासिल की गई digital और technical skills
  • अन्य verified credentials
  • समय के साथ हासिल की गई नई skills

इससे किसी व्यक्ति की career journey का एक व्यापक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो सकता है।

APAAR ID से जुड़ सकता है शिक्षा का रिकॉर्ड

Digital Skills Passport के प्रस्ताव में मौजूदा डिजिटल शिक्षा पहचान प्रणालियों के साथ integration की संभावना भी महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षा, स्किलिंग और रोजगार से जुड़े रिकॉर्ड को जोड़ने के लिए APAAR ID जैसे मौजूदा डिजिटल ढांचे का उपयोग किया जा सकता है। (LinkedIn)

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Digital Skills Passport अभी नीति आयोग का प्रस्ताव है। इसे किस रूप में लागू किया जाएगा, कौन-सा प्लेटफॉर्म इस्तेमाल होगा और नागरिकों के लिए इसकी अंतिम प्रक्रिया क्या होगी, इस पर आगे के सरकारी निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।

छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

यदि ऐसी व्यवस्था लागू होती है, तो छात्रों के लिए केवल परीक्षा पास करके डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें अपनी पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार से जुड़ी skills विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा।

उदाहरण के लिए, कोई छात्र B.Com कर रहा है और साथ में Excel, accounting software, data analysis या financial technology से जुड़ा प्रमाणित प्रशिक्षण करता है। भविष्य में इन उपलब्धियों को एक डिजिटल skills profile में जोड़ा जा सकता है।

इससे employer को उम्मीदवार की केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि उसकी skill profile भी देखने का अवसर मिल सकता है।

नौकरी देने वाली कंपनियों को क्या फायदा?

Employers के लिए भी Digital Skills Passport उपयोगी साबित हो सकता है। वर्तमान में recruitment के दौरान कंपनियां resume, certificates और interview के आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन करती हैं। कई बार resume में लिखी skills को independently verify करना मुश्किल होता है।

Verified digital credentials उपलब्ध होने पर कंपनियां उम्मीदवार की qualification और skills को ज्यादा आसानी से समझ सकती हैं। इससे recruitment प्रक्रिया में समय बचाने और सही उम्मीदवार तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

नीति आयोग की व्यापक स्किलिंग रणनीति का उद्देश्य भी training की संख्या गिनने के बजाय employment, income और career progression जैसे वास्तविक outcomes पर अधिक ध्यान देना है।

सिर्फ डिग्री के बजाय Skills पर बढ़ेगा जोर

Digital Skills Passport का सबसे बड़ा संभावित बदलाव hiring culture में आ सकता है। भारत में लंबे समय से कई नौकरियों में degree और formal qualification को प्रमुख आधार माना जाता रहा है। लेकिन नई तकनीकों और AI के दौर में लगातार बदलती skills की जरूरत ने इस मॉडल को चुनौती दी है।

नीति आयोग ने भी hiring को केवल degree-centric रखने के बजाय skills और employability पर ज्यादा जोर देने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट में स्कूली स्तर से vocational और employability skills विकसित करने की दिशा में भी सुझाव दिए गए हैं।

युवाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

आज एक युवा अपने पूरे करियर में कई बार नई skills सीख सकता है और अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर सकता है। ऐसे में सिर्फ एक कॉलेज की डिग्री उसके पूरे professional profile को नहीं दर्शाती।

Digital Skills Passport की अवधारणा व्यक्ति को lifelong learning के साथ जोड़ सकती है। यानी कॉलेज के बाद किए गए courses, certifications, apprenticeships और work experience भी उसकी career identity का हिस्सा बन सकते हैं।

इसका फायदा खास तौर पर उन लोगों को मिल सकता है जो traditional degree के बजाय vocational training, short-term courses, apprenticeships या practical experience के जरिए अपने करियर को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

चुनौतियां भी कम नहीं

Digital Skills Passport की सफलता केवल तकनीक तैयार करने से तय नहीं होगी। इसके लिए credentials की सही verification, data security, privacy और अलग-अलग educational तथा skilling platforms के बीच interoperability जरूरी होगी।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और digital access से वंचित लोगों को भी इसका लाभ मिले।

यदि अलग-अलग संस्थान अलग-अलग standards पर certificates जारी करते हैं, तो उन्हें एक common framework में जोड़ना भी बड़ी चुनौती हो सकती है।

भारत के Skill Ecosystem में बड़ा बदलाव संभव

नीति आयोग की रिपोर्ट में Digital Skills Passport को भारत के skilling architecture में प्रस्तावित चार system enablers में शामिल किया गया है। इसका व्यापक लक्ष्य शिक्षा, skill development और employment को एक-दूसरे से बेहतर तरीके से जोड़ना है। (Moneycontrol)

नीति आयोग का Skill Development & Employment Division भी employability, future-readiness और skill development को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में रखता है। (NITI Aayog)

अगर Digital Skills Passport जैसी व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में नौकरी के लिए उम्मीदवार की पहचान केवल उसकी degree से नहीं, बल्कि उसकी verified skills + experience + learning journey से भी हो सकती है।

निष्कर्ष

Digital Skills Passport भारत के रोजगार और skill development ecosystem को अधिक skills-based, transparent और outcome-oriented बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य युवाओं की शिक्षा, training और work experience को एक डिजिटल पहचान से जोड़ना है।

हालांकि अभी यह एक नीति प्रस्ताव है और इसके अंतिम स्वरूप तथा implementation को लेकर आगे के सरकारी फैसलों का इंतजार रहेगा। लेकिन इतना स्पष्ट है कि आने वाले समय में नौकरी की दुनिया में केवल यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं होगा कि “आपने क्या पढ़ा है?”, बल्कि यह भी पूछा जाएगा कि “आप वास्तव में क्या कर सकते हैं?”

यही बदलाव भारत के युवाओं को degree holders से आगे बढ़ाकर job-ready और skill-ready workforce बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख नीति आयोग की Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047 रिपोर्ट और हालिया मीडिया रिपोर्टों में प्रकाशित जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। Digital Skills Passport फिलहाल एक नीति प्रस्ताव है; इसकी अंतिम संरचना, कार्यान्वयन और नागरिकों के लिए प्रक्रिया में भविष्य में बदलाव संभव है। (NITI Aayog)

Digital Skills Passport: 5 जरूरी FAQ

1. Digital Skills Passport क्या है?
Digital Skills Passport एक प्रस्तावित डिजिटल रिकॉर्ड है, जिसमें किसी व्यक्ति की शिक्षा, skills, certificates, training और work experience जैसी जानकारियां एक जगह दर्ज की जा सकती हैं।

2. Digital Skills Passport की जरूरत क्यों है?
इसका उद्देश्य डिग्री के साथ-साथ व्यक्ति की वास्तविक skills और practical experience को पहचान देना और education तथा employment के बीच की दूरी कम करना है।

3. Digital Skills Passport में कौन-कौन सी जानकारी शामिल हो सकती है?
इसमें academic qualifications, skill certificates, vocational training, internships, apprenticeships, work experience और अन्य verified credentials शामिल किए जा सकते हैं।

4. क्या Digital Skills Passport अभी लागू हो चुका है?
नहीं। Digital Skills Passport फिलहाल नीति आयोग द्वारा सुझाया गया एक प्रस्ताव है। इसके अंतिम स्वरूप और implementation को लेकर आगे सरकारी निर्णय महत्वपूर्ण होंगे।

5. छात्रों और नौकरी तलाशने वालों को इससे क्या फायदा हो सकता है?
इससे उम्मीदवार अपनी डिग्री के अलावा अपनी verified skills, training और अनुभव को भी employers के सामने प्रस्तुत कर सकेंगे। इससे skills-based hiring को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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